जन वाणी न्यूज़
लोनी क्षेत्र के मीरपुर हिंदू गांव में डंपिंग ग्राउंड विवाद तेज, 1 मार्च को महापंचायत का ऐलान
ग्रामीणों ने कमेटी बनाकर गांव-गांव जनसंपर्क शुरू किया, किसान संगठन भी आए साथ
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
लोनी। डंपिंग ग्राउंड के विरोध में मीरपुर हिंदू गांव में चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। धरना दे रहे ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए और भारतीय किसान यूनियन के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद आगामी 1 मार्च को महापंचायत आयोजित करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले को आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
विरोध की पृष्ठभूमि: अविश्वास से आक्रोश तक
डंपिंग ग्राउंड को लेकर पिछले कुछ समय से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि आबादी के समीप कचरा निस्तारण की योजना से पर्यावरण, स्वास्थ्य और खेती—तीनों पर गंभीर असर पड़ेगा। पूर्व में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तनातनी की स्थिति भी बनी, जिससे अविश्वास और बढ़ गया। धरना लगातार जारी है और अब आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी स्पष्ट दिखाई दे रही है।
महापंचायत की तैयारी तेज
धरनास्थल पर हुई बैठक में ग्रामीणों ने एक कमेटी का गठन किया है, जो गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क साधेगी और महापंचायत में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करेगी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
किसान नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा मनोबल
बैठक के दौरान किसान संगठन के कई पदाधिकारी और क्षेत्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें प्रदेश संगठन मंत्री प्रवीण मालिक, टिकैत टीम से बिल्लू प्रधान, रूपेश मलिक (मोनू प्रधान), रविंदर त्यागी, राजेंद्र बेसला, सुशील त्यागी, अशोक पंडित, कन्नू त्यागी, महेश त्यागी, मोहम्मुदीन, तेजराम मंडार, राकेश त्यागी, प्रदीप शर्मा, डॉ. सहदेव और अनिल त्यागी सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे। नेताओं की मौजूदगी ने आंदोलन को संगठनात्मक मजबूती प्रदान की है।
आगे क्या?
महापंचायत की घोषणा के बाद प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है। यदि समय रहते संवाद का रास्ता नहीं निकला, तो यह विरोध बड़ा जनांदोलन बन सकता है। वहीं ग्रामीण साफ संकेत दे रहे हैं कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
अब सबकी नजर 1 मार्च पर टिकी है—जहां यह तय होगा कि यह आंदोलन स्थानीय विरोध तक सीमित रहेगा या क्षेत्रव्यापी संघर्ष का रूप लेगा।
