जन वाणी न्यूज़
योगी आदित्यनाथ का कड़ा संदेश: गलत रिपोर्ट पर होगी एफआईआर
जनता की शिकायतों पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी
रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता
गोरखपुर, 14 फरवरी। गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि जांच में गलत रिपोर्ट लगाने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हर मामले का निस्तारण केवल गहन और निष्पक्ष जांच के बाद ही होना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई “अस्वीकार्य” है।
इस कारण सख्त हुए सीएम
शनिवार को जनता की शिकायतें सुनने के दौरान कई लोगों ने आरोप लगाया कि उनके मामलों में गलत जांच रिपोर्ट लगा दी गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
कार्यक्रम में लगभग 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी गईं और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि हर वास्तविक शिकायत का प्रभावी समाधान कराया जाएगा।
“पीड़ितों की मदद में कोताही नहीं”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेताया कि पीड़ितों की सहायता में शिथिलता या देरी कतई बर्दाश्त नहीं होगी। यदि किसी स्तर पर जानबूझकर मामलों को लंबित रखा गया तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं के समाधान में बाधा बनने वाली चुनौतियों की पहचान कर तुरंत दूर किया जाए।
जमीन कब्जा और अन्य शिकायतों पर भी कड़ा रुख
जनता दर्शन में भूमि कब्जे की शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
वहीं इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगने वालों के मामलों में अस्पताल का अनुमान शीघ्र तैयार कर शासन को भेजने तथा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।
प्रशासनिक तंत्र को साफ संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि मामलों के समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जांच में गुमराह करने या जनता को भ्रमित करने की कोशिश करने वाले अधिकारियों को निलंबन और एफआईआर दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
खबर का निचोड़
जनता दर्शन से निकला यह संदेश सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र के लिए चेतावनी माना जा रहा है—फर्जी रिपोर्ट, देरी और लापरवाही अब जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होगा।
