ट्रॉनिका सिटी में प्रदूषण का साया: रसायनयुक्त पानी से घिरा औद्योगिक क्षेत्र, बीमारियों के बढ़ते खतरे पर सवाल

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जन वाणी न्यूज़

ट्रॉनिका सिटी में प्रदूषण का साया: रसायनयुक्त पानी से घिरा औद्योगिक क्षेत्र, बीमारियों के बढ़ते खतरे पर सवाल

एनजीटी की सख्ती, जुर्माने और सुधार के दावों के बावजूद प्रदूषण पर पूरी तरह विराम नहीं—ग्रामीणों ने उठाए भूजल और स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न

रविन्द्र बंसल वरिष्ठ संवाददाता 

गाजियाबाद । जनपद के लोनी क्षेत्र स्थित ट्रॉनिका सिटी में औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि रसायनयुक्त पानी सड़कों, नालियों और खाली प्लॉटों में जमा रहता है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। हालांकि आधिकारिक रिपोर्टों में हाल के वर्षों में कुछ सुधार दर्ज किए गए हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर सवाल कायम हैं।

एसटीपी और सीईटीपी की क्षमता व वर्तमान स्थिति

औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की क्षमता लगभग 6 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) बताई गई है और 2025 की निरीक्षण रिपोर्ट में इसे पर्यावरण मानकों के अनुरूप संचालित पाया गया।

इसके अलावा लोनी का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) 5 MLD क्षमता पर संचालित बताया गया है और अपशिष्ट जल के शोधन व पुनः उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

सीईटीपी स्थानीय रंगाई-टेक्सटाइल इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट को उपचारित कर जावली ड्रेन के माध्यम से हिंडन नदी तक पहुंचाने की व्यवस्था का हिस्सा है।

जुर्माना: गैर-अनुपालन पर कार्रवाई

वर्ष 2023 में डिस्चार्ज परीक्षणों में विफल रहने पर सीईटीपी पर ₹17 लाख का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जिसे बाद में वसूल भी लिया गया।

इससे पहले 2017 में प्लांट के गैर-कार्यशील रहने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम पर ₹2 लाख प्रतिदिन का जुर्माना लगाया था।

ट्रिब्यूनल ने उस समय टिप्पणी की थी कि निष्क्रिय प्लांट के कारण क्षेत्र में गंभीर प्रदूषण हुआ और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

निरीक्षण में क्या मिला

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 में जांची गई 19 औद्योगिक इकाइयों में से

14 इकाइयां मानकों के भीतर संचालित मिलीं

5 इकाइयां स्वेच्छा से बंद पाई गईं

ट्रिब्यूनल ने भविष्य में भी नियमित निरीक्षण जारी रखने का निर्देश दिया है ताकि उल्लंघन होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

ग्रामीणों के आरोप: बिना ट्रीटमेंट पानी और भूजल पर खतरा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ औद्योगिक इकाइयां अपशिष्ट जल को पूरी तरह उपचारित किए बिना जमीन में उतार रही हैं। यदि ऐसा होता है तो यह भूजल प्रदूषण का बड़ा कारण बन सकता है—हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से रसायनयुक्त पानी भरा रहता है, जिससे त्वचा रोग, पेट संबंधी समस्याएं और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा है। कैंसर जैसी घातक बीमारियों में वृद्धि का दावा भी स्थानीय स्तर पर किया जाता है, परंतु इन दावों की पुष्टि के लिए व्यापक स्वास्थ्य अध्ययन आवश्यक माना जाता है।

पहले भी खराब प्रदर्शन पर उठे थे सवाल

2023 और उसके बाद की शुरुआती जांचों में सीईटीपी के खराब प्रदर्शन का उल्लेख हुआ था, जिसके बाद सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

हालिया रिपोर्ट में स्थिति बेहतर बताई गई है, लेकिन निगरानी जारी रखने पर जोर दिया गया—यह संकेत है कि प्रदूषण नियंत्रण एक सतत प्रक्रिया है, एकबारगी समाधान नहीं।

बड़ा औद्योगिक फैलाव, बढ़ती चुनौती

यह औद्योगिक टाउनशिप लगभग 1700 एकड़ में फैली और करीब 2300 इकाइयों वाला क्षेत्र माना जाता है, जहां अपशिष्ट प्रबंधन एक जटिल प्रशासनिक चुनौती है।

निष्कर्ष

ट्रॉनिका सिटी में अपशिष्ट जल प्रबंधन को लेकर दो तस्वीरें सामने आती हैं—एक ओर आधिकारिक रिपोर्टें सुधार और अनुपालन का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग जमीन पर प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम की बात करते हैं।

एनजीटी की सख्ती, जुर्माने और नियमित निरीक्षण के निर्देश यह स्पष्ट करते हैं कि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय जवाबदेही अनिवार्य है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या निगरानी और नियमों का पालन स्थायी रूप से सुनिश्चित हो पाएगा, या प्रदूषण का संकट समय-समय पर फिर सिर उठाता रहेगा?

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