जांच के बहाने दरोगा पर महिला से नजदीकी बढ़ाने का आरोप, एसपी ने किया लाइन हाजिर

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जन वाणी न्यूज़ 

जांच के बहाने दरोगा पर महिला से नजदीकी बढ़ाने का आरोप, एसपी ने किया लाइन हाजिर

आरोपी दरोगा अखिलेश यादव
पति के साथ पीड़िता

पति को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी का भी आरोप; सीओ को सौंपी गई जांच, दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई के संकेत

बाराबंकी। जिले में एक दरोगा पर शादीशुदा महिला से कथित रूप से नजदीकी बढ़ाने, दबाव बनाने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप सामने आने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला प्रकाश में आते ही पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी दरोगा अखिलेश यादव को लाइन हाजिर कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी रामनगर (गरिमा पंत) को सौंप दी है।

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित दरोगा के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि दरोगा का करीब दो वर्ष पूर्व बाराबंकी कोतवाली में तबादला हुआ था और वर्तमान में वह रामनगर थाने से संबद्ध था।

पीड़िता का आरोप: जांच के नाम पर बढ़ाई नजदीकियां

पीड़ित महिला के अनुसार, वह एक पारिवारिक विवाद के सिलसिले में पुलिस के संपर्क में आई थी। आरोप है कि इसी दौरान दरोगा ने जांच का हवाला देकर उसे बार-बार फोन करना शुरू किया और व्यक्तिगत मुलाकात का दबाव बनाया। विरोध करने पर कथित तौर पर कहा गया कि उसके पति को झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाएगा।

महिला का यह भी आरोप है कि एक बार रास्ते में रोककर उसे जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश की गई और अभद्र व्यवहार किया गया। शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटने लगे, जिसके बाद वह किसी तरह वहां से निकल सकी।

घर तक पहुंचने और दबाव बनाने के आरोप

पीड़िता ने शिकायत में यह भी कहा है कि दरोगा कई बार घर पर उस समय पहुंचा, जब परिवार के पुरुष सदस्य मौजूद नहीं थे। एक बार कमरे तक आने की कोशिश की, लेकिन परिजनों के आ जाने से लौट गया। स्थानीय स्तर पर दो-तीन बार शिकायत किए जाने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब मामला वरिष्ठ अधिकारियों और सीएम पोर्टल तक पहुंचाया गया।

पति को छोड़कर मेरी बन जाओ’—कथित आपत्तिजनक प्रस्ताव

महिला का आरोप है कि दरोगा ने उससे कहा कि वह पढ़ी-लिखी है, पति को छोड़कर उसके साथ रहने लगे तो वह नौकरी लगवा देगा और बेहतर जिंदगी देगा। महिला द्वारा इनकार करने पर कथित तौर पर धमकियां दी गईं।

पुलिस की सख्ती या महज औपचारिकता?

मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को लेकर जहां एक ओर सख्ती का संदेश देने की कोशिश दिख रही है, वहीं यह सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि पहले की शिकायतों पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो स्थिति यहां तक क्यों पहुंचती।

जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच क्षेत्राधिकारी स्तर से कराई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली, आंतरिक निगरानी व्यवस्था और संवेदनशील मामलों के निपटारे पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—क्या आरोपों की पुष्टि होगी और विभाग कड़ी मिसाल पेश करेगा, या यह मामला भी औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।

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