जन वाणी न्यूज़
मंडोला में किसानों का प्रदर्शन: व्यापारिक समझौते से लेकर अवैध खनन और प्रदूषण तक उठे सवाल
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, आवास विकास परिषद के अधिकारियों पर गंभीर आरोप; दोषियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग
गाजियाबाद (मंडोला), 12 फरवरी 2026। आवास विकास परिषद के खिलाफ चल रहे किसान सत्याग्रह आंदोलन के तहत गुरुवार को किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अमेरिका के साथ किए गए व्यापारिक समझौते का भी विरोध जताया और तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।
किसानों ने आरोप लगाया कि परिषद की योजना से जुड़ी जमीन पर रात के समय अवैध मिट्टी खनन कराया जा रहा है। साथ ही औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे को कथित रूप से उन्हीं गड्ढों में डंप कर आग के हवाले किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
अधिकारियों पर सीधे आरोप
शिकायती पत्र में परिषद के अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तल और अधिशासी अभियंता नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों का दावा है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
व्यापारिक समझौते पर भी जताई नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते को किसान हितों के खिलाफ बताते हुए चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ऐसे समझौते घरेलू कृषि व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सरकार को किसानों की राय को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अवैध खनन, कचरा डंपिंग और प्रदूषण पर जल्द रोक नहीं लगी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और भूमि की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी की।
बड़ी संख्या में किसान नेता रहे मौजूद
इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश संगठन मंत्री प्रवीण मलिक, बिल्लू प्रधान, टीनू चौधरी, नीरज त्यागी, मास्टर महेंद्र सिंह त्यागी, मोनू प्रधान, रविंदर त्यागी, लीलू त्यागी, बॉबी त्यागी, इस्लामुद्दीन, रामनरेश, गौरव त्यागी, सुरेंद्र शर्मा, रूपेश मलिक सहित कई किसान मौजूद रहे।
परिषद और प्रशासन का पक्ष आना बाकी
हालांकि खबर लिखे जाने तक आवास विकास परिषद या संबंधित अधिकारियों की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच कराई जा सकती है।
आवास विकास के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है—क्या जांच बैठती है या मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है।
