रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
यूपी में बड़े पैमाने पर आईपीएस तबादले, 24 अफसरों के ट्रांसफर से पुलिस महकमे में हलचल











11 जिलों के एसपी-एसएसपी बदले, प्रमोशन के साथ नई तैनाती; कानून-व्यवस्था मजबूत करने की कवायद या प्रशासनिक रणनीति?
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। कुल 24 आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें 6 ऐसे जिला पुलिस प्रमुख भी शामिल हैं जिन्हें हाल ही में प्रमोशन देकर डीआईजी बनाया गया था। इस फेरबदल के तहत 11 जिलों में एसपी और एसएसपी बदले गए हैं, जिससे पुलिस महकमे में व्यापक हलचल देखी जा रही है।
सात साल तक आंखों के सर्जन के रूप में कार्य कर चुके डॉक्टर कौस्तुभ को गोरखपुर का नया एसएसपी बनाया गया है। वहीं लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक सुजीत पांडेय को प्रमोशन के बाद एनीमेशन एवं आपात सेवाएं (आपात प्रबंधन) का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। वर्ष 1994 बैच के आईपीएस सुजीत पांडेय तेज-तर्रार अधिकारियों में गिने जाते हैं और उनकी नई तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी क्रम में प्रमोशन पाकर आईजी से एडीजी बने प्रवीण कुमार को एडीजी जोन लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। वह अब तक अयोध्या रेंज के आईजी थे। उनके स्थान पर मिर्जापुर के एसपी सोमेन वर्मा को अयोध्या भेजा गया है, जिन्हें हाल ही में आईजी पद के लिए प्रमोशन मिला है।
जौनपुर के एसपी कौस्तुभ का तबादला गोरखपुर किया गया है, जबकि गोरखपुर के एसपी राज करन नैयर, जिनका प्रमोशन पहली जनवरी को हुआ था, अब गाजियाबाद में एडिशनल सीपी बनाए गए हैं।
चर्चित अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी
बिहार के जमुई जिले के मलयपुर गांव निवासी और 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी सुकीर्ति माधव मिश्रा भी इस फेरबदल का हिस्सा हैं। वर्ष 1988 में जन्मे मिश्रा वर्तमान में आगरा में तैनात थे। वे उस समय चर्चा में आए थे जब 4 सितंबर 2020 को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “मैं खाकी हूं…” शीर्षक कविता सुनाई थी।
2013 बैच के आईपीएस अधिकारी कुंवर अनुपम सिंह का नाम भी इस सूची में शामिल है। अगस्त 2023 में उनका कन्नौज से अमरोहा तबादला चर्चा का विषय बना था। उस दौरान सांसद सुब्रत पाठक ने आरोप लगाया था कि तबादले के बाद बैंक डेबिट के जरिए उनके क्षेत्र के पीआरओ को पैसे लेकर थानाध्यक्ष बना दिया गया। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची थी, हालांकि बाद में आईजी कानपुर ने आदेश निरस्त कर दिया था।
घोटाला उजागर करने वाली अधिकारी को मिली नई तैनाती
संभल में 100 करोड़ रुपये से अधिक के बीमा घोटाले का पर्दाफाश करने वाली अपर पुलिस अधीक्षक अंकुति शर्मा का तबादला गौतमबुद्धनगर कर दिया गया है। उन्हें अपर पुलिस उपायुक्त बनाया गया है। वर्ष 2020 बैच की आईपीएस अंकुति शर्मा पहले भी बुलंदशहर में एक विधवा महिला के घर पहुंचकर तत्काल कार्रवाई करने के कारण चर्चा में रही थीं।
प्रशासनिक संदेश और राजनीतिक संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े पैमाने पर तबादले केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि यह सरकार की कानून-व्यवस्था पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी माने जाते हैं। जिन जिलों में अपराध नियंत्रण, संवेदनशील हालात या प्रशासनिक कसावट की जरूरत महसूस की जाती है, वहां अक्सर अनुभवी या तेज-तर्रार अधिकारियों की तैनाती की जाती है।
हालांकि बार-बार होने वाले तबादलों पर सवाल भी उठते रहे हैं। विपक्ष अक्सर इसे स्थायित्व की कमी से जोड़ता है, जबकि सरकार का तर्क होता है कि बेहतर पुलिसिंग के लिए समय-समय पर बदलाव जरूरी हैं।
निष्कर्ष:
राज्य में हुए इस व्यापक फेरबदल से साफ संकेत मिलता है कि पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार सक्रिय है। अब देखने वाली बात होगी कि नई तैनाती पाए अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को कितना मजबूत कर पाते हैं और जनता के बीच पुलिस की कार्यशैली में कितना सुधार दिखाई देता है।
