लोनी तहसील में वकीलों का हंगामा, एसडीएम पर अभद्र व्यवहार का आरोप — चौथे दिन भी हड़ताल, रजिस्ट्री कार्य ठप

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

लोनी तहसील में वकीलों का हंगामा, एसडीएम पर अभद्र व्यवहार का आरोप — चौथे दिन भी हड़ताल, रजिस्ट्री कार्य ठप

नव-निर्मित तहसील भवन में बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद; स्थानांतरण और सुविधाएं मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

गाजियाबाद (लोनी)। लोनी तहसील में अधिवक्ताओं और एसडीएम के बीच कथित अभद्र व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। तहसील बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि बैठने की व्यवस्था को लेकर बातचीत करने पहुंचे वकीलों के साथ एसडीएम ने न केवल अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उन्हें अपने कक्ष से बाहर निकलवा दिया। घटना के विरोध में अधिवक्ता लगातार चौथे दिन हड़ताल पर रहे, जिससे रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया।

बार एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 30 जनवरी 2026 को करीब 12:30 बजे अधिवक्ता नव-निर्मित तहसील भवन में विधि व्यवसाय के लिए बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से एसडीएम से मिलने पहुंचे थे। आरोप है कि कक्ष में प्रवेश करते ही एसडीएम नाराज हो गए और कथित तौर पर कहा कि “शोर क्यों कर रहे हो, दिखाई नहीं देता कि फोन पर बात कर रहा हूं, चुपचाप खड़े रहो।” इसके बाद जब अधिवक्ताओं ने नए भवन में चैंबर्स के लिए स्थान की मांग उठाई तो उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि उनके लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं है।

अपमान का आरोप, अधिवक्ताओं में आक्रोश

बार एसोसिएशन का कहना है कि इस व्यवहार से अधिवक्ताओं में भारी रोष है। उनका आरोप है कि विधि व्यवसाय के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके बजाय सम्मानजनक संवाद भी नहीं किया गया।

मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी

अधिवक्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण नहीं होता और नए तहसील भवन में चैंबर्स की समुचित व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक दिन-रात हड़ताल जारी रहेगी। साथ ही रजिस्ट्री कार्यालय का कार्य भी पूर्ण रूप से बंद रखने की घोषणा की गई है। बार एसोसिएशन ने दावा किया है कि उन्हें प्रदेश की अन्य बार एसोसिएशनों का भी समर्थन मिल रहा है।

आम जनता पर पड़ रहा असर

रजिस्ट्री कार्य ठप होने से जमीन की खरीद-फरोख्त और अन्य जरूरी दस्तावेजी प्रक्रियाएं अटक गई हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तहसील जैसे संवेदनशील कार्यालय में कामकाज रुकना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

समाधान की ओर टिकी निगाहें

यह प्रकरण अब केवल अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों की सुचारु व्यवस्था से भी जुड़ गया है। ऐसे में जरूरी है कि मामले का शीघ्र समाधान निकाला जाए ताकि तहसील का कामकाज सामान्य हो सके और टकराव की स्थिति समाप्त हो।

निष्कर्ष:
लोनी तहसील का यह विवाद प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच संवादहीनता की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है। यदि समय रहते ठोस पहल नहीं की गई, तो यह टकराव और गहरा सकता है — जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ना तय है।

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