फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनाने वाला गिरोह बेनकाब, महिला समेत 5 गिरफ्तार

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनाने वाला गिरोह बेनकाब, महिला समेत 5 गिरफ्तार

25 लोगों को साजिश के तहत दिलाए जा रहे थे पासपोर्ट • दिल्ली-मेरठ तक फैला नेटवर्क • आधार, लाइसेंस, बैंक पासबुक और पासपोर्ट बरामद

भोजपुर। अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज पासपोर्ट को फर्जी कागजात के सहारे बनवाने वाले गिरोह का थाना भोजपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस और स्वाट टीम ग्रामीण जोन की संयुक्त कार्रवाई में महिला सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में कूटरचित दस्तावेज, मोबाइल फोन, नकदी और दो कारें बरामद हुई हैं।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में 25 लोगों के खिलाफ साजिश रचकर धोखाधड़ी करने और फर्जी दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट आवेदन में इस्तेमाल करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

मुखबिर की सूचना पर दबोचा गया गिरोह

मामले की जांच के दौरान थाना स्तर पर विशेष टीमों का गठन किया गया। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस और स्वाट टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर गलत पते के आधार पर लोगों के पासपोर्ट बनवाते थे।

दिल्ली से मेरठ तक फैला था जाल

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विवेक गांधी (35), प्रकाश सुब्बा (61), अरुण कुमार (32), अमनदीप सिंह उर्फ अजमीत सिंह (19) और सातवंत कौर (52) के रूप में हुई है। सभी अलग-अलग स्थानों के निवासी हैं, जिनमें दिल्ली और मेरठ शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि गिरोह का नेटवर्क बहुजनपदीय स्तर पर सक्रिय था और संगठित तरीके से काम कर रहा था।

बरामदगी ने खोली फर्जीवाड़े की परतें

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से

04 फर्जी आधार कार्ड

02 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस

02 फर्जी बैंक पासबुक

02 पासपोर्ट

06 मोबाइल फोन

ब्रेजा और इको स्पोर्ट कार

4030 रुपये नकद

बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों के जरिए कितने लोगों के पासपोर्ट बन चुके हैं और किन-किन स्थानों पर इनका इस्तेमाल हुआ, इसकी गहन जांच की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मामला

फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाना केवल धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय माना जाता है। ऐसे पासपोर्ट का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों, अवैध प्रवास या अन्य संदिग्ध कार्यों में होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि जांच एजेंसियां गिरोह के पूरे नेटवर्क और संभावित ग्राहकों की पड़ताल में जुट गई हैं।

25 संदिग्धों की भूमिका जांच के दायरे में

मुकदमे में नामजद 25 लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये लोग गिरोह के ग्राहक थे या साजिश का हिस्सा। अन्य आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है।

डिजिटल एंगल भी जांच के घेरे में

आईटी एक्ट की धाराएं लगाए जाने से साफ है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में डिजिटल माध्यमों का उपयोग हुआ हो सकता है। जब्त मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच से गिरोह के काम करने के तरीके, संपर्क सूत्र और संभावित बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।

आगे की कार्रवाई जारी

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं गिरोह का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय रैकेट से तो नहीं है।

इस कार्रवाई को पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले संगठित अपराध के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर फर्जी दस्तावेजों के सहारे आवेदन प्रणाली तक पहुंच कैसे बन गई। अब जांच का फोकस इसी कड़ी को जोड़ने पर है।

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