रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
64 लाख की लूट पर पुलिस महकमे में गिरी गाज, हापुड़ कोतवाली प्रभारी समेत तीन अधिकारी निलंबित
उच्च अधिकारियों की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप; कई जिलों की टीमें बदमाशों की तलाश में, सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
हापुड़। राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर चावल व्यापारी से 64 लाख रुपये की दिनदहाड़े लूट के मामले में पुलिस महकमे पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई की गाज गिर गई है। उच्च अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए हापुड़ कोतवाली प्रभारी सहित तीन पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में पुलिस तंत्र में खलबली मच गई है और विभागीय जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही अब भारी पड़ेगी।
गौरतलब है कि इस सनसनीखेज वारदात को लेकर कल ही घटना प्रमुख खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन अब सामने आई विभागीय कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
घटनाक्रम: बैंक से निकले, रास्ते में लूटे गए
राजस्थान के सीकर निवासी चावल व्यापारी राकेश राजपूत अपने साझेदार वैभव शुक्ला के साथ रेलवे रोड स्थित एक निजी बैंक से 64 लाख रुपये निकालकर बाइक से दिल्ली जा रहे थे। पिलखुवा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर पहले से घात लगाए स्कूटी सवार तीन बदमाशों ने हथियारों के बल पर नकदी लूट ली और फरार हो गए।
दिनदहाड़े हुई इस दुस्साहसिक वारदात ने न केवल व्यापारियों को दहला दिया, बल्कि पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।
उच्च अधिकारियों की सख्ती, तीन पुलिस अधिकारी निलंबित
प्रारंभिक पड़ताल में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आने पर उच्च अधिकारियों ने कठोर कदम उठाए। हापुड़ कोतवाली प्रभारी निरीक्षक श्यौपाल सिंह, छिजारसी चौकी प्रभारी उप निरीक्षक महन्तराज यादव तथा एचपीडीए चौकी प्रभारी उप निरीक्षक जितेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों ने माना कि क्षेत्र के प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त निगरानी नहीं थी, गश्त व्यवस्था प्रभावी नहीं रही और अपराधियों पर नियंत्रण में ढिलाई बरती गई। यह कार्रवाई पुलिस विभाग के लिए चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है।
“जनता की सुरक्षा सर्वोपरि”
वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिसकर्मियों को सक्रिय रहकर मार्गों पर निगरानी, संदिग्धों की जांच और प्रभावी गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच तेज, क्षेत्राधिकारी की भूमिका भी घेरे में
पूरे प्रकरण की विभागीय जांच अपर पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है। साथ ही क्षेत्राधिकारी के पर्यवेक्षण की भी जांच कराई जा रही है, जिससे यह तय हो सके कि चूक केवल थाने स्तर पर हुई या निगरानी तंत्र भी कमजोर था।
बदमाश अब भी पकड़ से दूर
लूट की वारदात के खुलासे के लिए हापुड़ की आठ पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। बुलंदशहर, मेरठ और बागपत की पुलिस को भी अभियान में लगाया गया है। प्रमुख मार्गों पर जांच बढ़ा दी गई है और आसपास के जनपदों को सतर्क कर दिया गया है।
हालांकि अब तक बदमाशों का कोई ठोस सुराग हाथ न लगना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
व्यापारियों में भय, व्यवस्था पर अविश्वास
इतनी बड़ी रकम की लूट ने कारोबारी वर्ग को चिंता में डाल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी सुरक्षा का यह हाल है, तो आम सड़कों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। कई व्यापारियों ने नकदी ले जाने में अतिरिक्त सुरक्षा की मांग उठाई है।
संदेश साफ—परिणाम चाहिए
तीन अधिकारियों का निलंबन प्रशासन की सख्ती जरूर दर्शाता है, लेकिन असली परीक्षा बदमाशों की गिरफ्तारी और लूटी गई रकम की बरामदगी होगी। जब तक घटना का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक कानून व्यवस्था पर उठे सवाल थमने वाले नहीं हैं।
फिलहाल, पुलिस पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है—अब केवल कार्रवाई नहीं, परिणाम भी देने होंगे।
