इस्तीफ़ा देकर घर लौटे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, समर्थकों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का विरोध बना राजनीतिक विस्फोट

इस्तीफ़ा देकर घर लौटे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, समर्थकों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत

कानपुर/बरेली।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान के विरोध में इस्तीफ़ा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का शनिवार को कानपुर स्थित आवास पर भव्य स्वागत किया गया। जैसे ही वे केशव नगर स्थित अपने घर पहुंचे, महिलाओं ने शंखनाद कर उनका अभिनंदन किया। मां गीता अग्निहोत्री ने उन्हें माला पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद समर्थकों और परिचितों ने फूल-मालाएं पहनाईं, नारेबाज़ी हुई और माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया।

इस्तीफ़े के पीछे आस्था, नहीं पद की लालसा: अलंकार अग्निहोत्री

बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि वे किसी पद या शंकराचार्य की ओर से मिलने वाले किसी दायित्व के इच्छुक नहीं हैं।
उन्होंने कहा—

> “मैं वहां से तीन दिन में प्लान बनाकर शंकराचार्य से मिलने जाऊंगा, लेकिन किसी पद को लेने का कोई इरादा नहीं है। मेरा अगला कदम देश और समाज के लिए होगा।”

 

राजनीतिक बयानबाज़ी तेज, केंद्र और राज्य सरकार पर सीधे आरोप

अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखे हमले करते हुए कहा—

> “देश इस समय अलर्ट मोड में है। आपने देश की आत्मा को हमला किया है। मैं कानपुर में रहकर डंडी मार्च करूंगा, तात्या टोपे की क्रांति करूंगा। कानपुर क्रांतिकारियों का शहर है।”

 

उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 के चुनाव को देखते हुए उनकी पोस्टिंग गुजरात पैटर्न पर की गई थी और केंद्र सरकार की लड़ाई राज्य सरकार से नहीं बल्कि एक व्यक्ति—मुख्यमंत्री—से चल रही है।

UGC एक्ट, एजेंसियों और ‘टारगेटेड कार्रवाई’ का आरोप

अग्निहोत्री ने कहा कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, उन्हें ED, CBI और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों के जरिए प्रताड़ित किया जाता है।
उन्होंने UGC एक्ट को लेकर कहा—

> “मैंने कहा था कि UGC एक्ट वापस हो, लेकिन जब 26 जनवरी तक कोई फैसला नहीं हुआ तो मैंने इस्तीफ़ा दे दिया। मुझे लगा इससे एक संदेश जाएगा।”

 

उनका दावा है कि इस फैसले के बाद जनता ने इस संदेश को स्वीकार किया और उनके पक्ष में करीब 1400 संगठन सामने आए।

समर्थक बोले— ‘यह नैतिक साहस का उदाहरण’

समर्थकों का कहना है कि अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी पद छोड़कर यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक सेवा केवल कुर्सी का नाम नहीं, बल्कि संविधान, आस्था और आत्मसम्मान की रक्षा का माध्यम है।
उनका मानना है कि यह कदम आने वाले समय में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल

इस इस्तीफ़े और उसके बाद दिए गए बयानों से प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्ष को नया मुद्दा मिलने के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला अब व्यक्तिगत विरोध से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का रूप लेता दिख रहा है।

निष्कर्ष

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का विरोध अब केवल धार्मिक या भावनात्मक विषय नहीं रह गया है। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफ़ा, उनके तीखे बयान और बढ़ता जनसमर्थन इस प्रकरण को राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक बहस के केंद्र में ले आया है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह कदम एक व्यक्तिगत विरोध तक सीमित रहता है या व्यापक जनआंदोलन की शक्ल लेता है।

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