लोनी तहसील में वकील–प्रशासन टकराव गहराया, बार एसोसिएशन की हड़ताल जारी , रात में भी चला धरना

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

लोनी तहसील में वकील–प्रशासन टकराव गहराया, बार एसोसिएशन की हड़ताल जारी

चैंबर विवाद पर एसडीएम कटघरे में, सवालों से बचते रहे और पीछे के दरवाजे से निकलने का आरोप

गाजियाबाद/लोनी।
लोनी तहसील परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबर को लेकर उपजा विवाद अब प्रशासनिक संवेदनहीनता और जवाबदेही के संकट में तब्दील हो चुका है। लोनी तहसील बार एसोसिएशन ने एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायिक कार्यों के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक एसडीएम सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और चैंबर की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

चैंबर विवाद से शुरू हुआ टकराव

तस्वीर में उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, तहसील परिसर में वर्षों से अधिवक्ताओं के लिए समुचित चैंबर व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इस मूल समस्या को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। आरोप है कि हालिया घटनाक्रम में अधिवक्ताओं को उनके चैंबर खाली करने के निर्देश दिए गए, जिसे उन्होंने अपने पेशे, सम्मान और स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।

एसडीएम के रवैये पर गंभीर सवाल

30 जनवरी 2026 को विवाद उस समय और बढ़ गया जब अधिवक्ताओं ने एसडीएम से सीधे सवाल पूछने की कोशिश की। बार एसोसिएशन का आरोप है कि एसडीएम न तो किसी सवाल का स्पष्ट जवाब दे पाए और न ही समाधान को लेकर कोई ठोस आश्वासन दिया।
आरोप यह भी है कि बढ़ते आक्रोश को देखते हुए एसडीएम सामने से निकलने के बजाय पीछे के दरवाजे से चुपचाप कार्यालय छोड़कर चले गए, जिसे अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक जवाबदेही से “पलायन” करार दिया है।

धरने पर बैठे अधिवक्ता

एसडीएम के इस व्यवहार से आक्रोशित होकर लोनी तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ता धरने पर बैठ गए। एसोसिएशन की आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि—

जब तक एसडीएम सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते

अधिवक्ताओं के लिए चैंबर की स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती

तब तक न तो न्यायिक कार्य किया जाएगा और न ही रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज चलने दिया जाएगा।

वकीलों में एसडीएम के अभद्र व्यवहार को लेकर आक्रोश इस कदर है कि कड़कड़ाती सर्दी में भी रात को भी धरना प्रदर्शन जारी रहा।

रजिस्ट्री कार्यालय भी बंद, जनता परेशान

हड़ताल का असर अब सीधे आम जनता पर पड़ने लगा है। जमीन की रजिस्ट्री, वादों की सुनवाई और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। दूर-दराज से आए नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अधिवक्ताओं का कहना है कि सम्मान और अधिकारों की लड़ाई में पीछे हटना संभव नहीं है।

प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ा अविश्वास

अब तक प्रशासन की ओर से न तो एसडीएम के आरोपित व्यवहार पर कोई स्पष्टीकरण आया है और न ही विवाद सुलझाने की कोई औपचारिक पहल। इस चुप्पी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि अधिकारी सवालों से बचेंगे और जवाबदेही से भागेंगे, तो व्यवस्था पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

केवल चैंबर का नहीं, सम्मान और जवाबदेही का सवाल

यह विवाद अब केवल चैंबर की व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच आपसी सम्मान, संवाद और संवैधानिक मर्यादा का प्रश्न बन चुका है।
फिलहाल निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—या तो समय रहते हस्तक्षेप कर समाधान निकाला जाए, या फिर यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है।

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