रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी
महोबा में उबाल पर जनाक्रोश: जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोका गया
50 से अधिक गाड़ियों से घेरा, 100 ग्राम प्रधान विधायक के साथ; सड़क और पेयजल संकट को लेकर खुला टकराव


महोबा । जिले में शुक्रवार को उस समय हालात असाधारण हो गए जब उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत के नेतृत्व में रोका गया। मंत्री के आगे लगभग 50 गाड़ियां 20 से अधिक बाइक खड़ी कर दी गईं, जिससे पूरा मार्ग अवरुद्ध हो गया। इस दौरान मौके पर 100 से अधिक ग्राम प्रधान, बड़ी संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मामला केवल टूटी सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पेयजल संकट को लेकर गहरा असंतोष खुलकर सामने आ गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। जैसे ही उनका काफिला रामश्री महाविद्यालय के समीप पहुंचा, पहले से मौजूद विधायक समर्थकों और ग्राम प्रधानों ने रास्ता रोक लिया। देखते ही देखते काफिले के आगे-पीछे वाहनों की लंबी कतार लग गई। अचानक रुके काफिले के कारण सड़क के दोनों ओर जाम की स्थिति बन गई।
सड़क नहीं, व्यवस्था पर सवाल
विरोध का पहला कारण जल जीवन मिशन के तहत की गई खुदाई के बाद बदहाल सड़कें बताया गया। विधायक और ग्राम प्रधानों का आरोप था कि पाइपलाइन बिछाने के नाम पर गांव-गांव सड़कें खोद दी गईं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी मरम्मत नहीं हुई। कई मार्ग इतने खराब हैं कि एंबुलेंस, स्कूली वाहन और कृषि परिवहन तक बाधित हो रहा है।
पेयजल संकट बना असली मुद्दा
हालात उस समय और गंभीर हो गए जब ग्राम प्रधानों ने खुलकर कहा कि नल लगाए गए, पाइप डाली गई, लेकिन पानी नहीं पहुंचा। कई गांवों में महीनों से टंकियां बनी खड़ी हैं, पर सप्लाई चालू नहीं हुई। ग्रामीणों को आज भी हैंडपंप, कुएं और टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। प्रधानों का कहना था कि जब पानी ही नहीं मिल रहा तो जल जीवन मिशन केवल कागजों तक सीमित क्यों रह गया।
अधिकारियों से तीखी झड़प
विरोध के दौरान मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों के साथ तेज बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। समर्थकों का आरोप था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारी मौके पर नहीं आते। कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण हो गए, हालांकि स्थिति को बिगड़ने से पहले नियंत्रित कर लिया गया।
विधायक ने सीधे मंत्री से रखी बात
विधायक बृजभूषण राजपूत ने मंत्री के सामने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह विरोध राजनीति नहीं, बल्कि जनता की मजबूरी है। उन्होंने कहा कि जब गांवों में न सड़क बची है और न पानी, तब जनप्रतिनिधियों के पास विरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाता। विधायक के साथ खड़े ग्राम प्रधानों ने भी एक-एक कर अपनी समस्याएं गिनाईं।
मंत्री का रुख
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मौके पर लोगों की बातें सुनीं और आश्वासन दिया कि शिकायतों की स्थल स्तर पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कार्यों में लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई होगी। इसके बाद मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक कर पूरे मामले पर चर्चा की गई।
जनता के गुस्से का संकेत
इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि महोबा में सड़क और पेयजल दोनों ही मुद्दों पर जनता का आक्रोश चरम पर है। 100 ग्राम प्रधानों का एक साथ सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि समस्या व्यापक है और केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं।
संवेदनशील प्रशासनिक चुनौती
घटना सत्तारूढ़ दल के भीतर ही गंभीर असंतोष को दर्शाती है। यदि समय रहते सड़क मरम्मत और पेयजल आपूर्ति को दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह असंतोष और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भरोसे की बहाली कैसे की जाए और ज़मीनी स्तर पर योजनाओं का वास्तविक लाभ कैसे पहुंचे।
निष्कर्ष:
महोबा की यह घटना केवल एक मंत्री के काफिले को रोके जाने की नहीं है, बल्कि यह बुनियादी सुविधाओं से जूझते गांवों की सामूहिक पीड़ा और चेतावनी है। सड़क और पानी जैसे मूल अधिकारों पर उपजा यह आक्रोश आने वाले समय में प्रशासन और सरकार—दोनों के लिए निर्णायक परीक्षा साबित हो सकता है।
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