रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
गोलीकांड के बाद भी बेखौफ भू-माफिया, पीड़ित परिवार दहशत में
रिपोर्ट दर्ज, दो आरोपी जेल में… फिर भी मुख्य आरोपी खुलेआम, डीएम से गुहार
गाजियाबाद | लोनी सरकारी बंजर भूमि पर अवैध कब्जे के विरोध में आवाज उठाने पर शिकायतकर्ता के घर में घुसकर की गई ताबड़तोड़ फायरिंग और जानलेवा हमले के मामले ने अब प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी गाजियाबाद को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले को अति संवेदनशील बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मुकदमा दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी अधूरी
पुलिस द्वारा इस सनसनीखेज मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और दो आरोपी जेल भी भेजे जा चुके हैं, लेकिन मुख्य आरोपी—जो कथित तौर पर भू-माफिया हैं—अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी लगातार धमकी दे रहे हैं और शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
अपराधिक इतिहास वाले आरोपी, फिर भी पुलिस की ढील
शिकायती पत्र में उल्लेख किया गया है कि आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास है।
इन पर पूर्व में—
हत्या
हत्या के प्रयास
दबंगई व अवैध कब्जे
जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
डीएम को दिए पत्र में क्या-क्या मांग की गई
जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में पीड़ित परिवार ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि—
फरार सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी कराई जाए
आरोपियों पर उनके आपराधिक इतिहास को देखते हुए सख्त धाराएं/गैंगस्टर एक्ट लगाया जाए
सरकारी बंजर भूमि (खसरा संख्या 854/1261) को कब्जा मुक्त कराया जाए
इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग व स्थानीय पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए
शिकायतकर्ता व उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
खौफ के साए में पीड़ित परिवार
लगातार मिल रही धमकियों के चलते शिकायतकर्ता और उसका परिवार भयभीत है। घर से बाहर निकलने तक में डर बना हुआ है। गांव में भी दहशत का माहौल है और लोग खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
कानून-व्यवस्था की परीक्षा
जिस मामले में—
घर में घुसकर फायरिंग हुई
एक व्यक्ति को गोली लगी
कई लोग घायल हुए
उसमें भी यदि आरोपी बेखौफ घूम रहे हों, तो यह कानून के राज पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अब निगाहें जिलाधिकारी और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।
यह मामला अब सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि भू-माफियाओं के आतंक, पुलिस की आधी-अधूरी कार्रवाई और प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत का गंभीर उदाहरण बन चुका है।
डीएम को दी गई शिकायत के बाद क्या प्रशासन सख्त कदम उठाता है या नहीं—यह आने वाले दिनों में तय करेगा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या नहीं।
