रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
संगम पर परंपरा–व्यवस्था आमने-सामने, मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य का स्नान टला



भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक कारणों से उत्पन्न असहज हालात, संत समाज में गहरी पीड़ा
प्रयागराज । मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर माघ मेले में संगम स्नान के लिए पहुंचे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का स्नान प्रशासनिक कारणों से नहीं हो सका। संगम मार्ग पर उनकी पालकी रोके जाने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति ने संत परंपराओं और भीड़ प्रबंधन के बीच संतुलन के प्रश्न को सामने ला दिया।
परंपरागत पालकी यात्रा रोकी गई, स्थिति तनावपूर्ण
शंकराचार्य परंपरागत पालकी यात्रा के माध्यम से संगम स्नान के लिए जा रहे थे। अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रथ से उतरकर पैदल जाने का निर्देश दिया गया। इस पर शिष्यों ने विरोध किया। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रही, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस हस्तक्षेप करने को मजबूर हुई।
हिरासत और पालकी में क्षति
घटनाक्रम के दौरान कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पालकी को हटाते समय उसका हिस्सा टूट गया। परिणामस्वरूप शंकराचार्य संगम स्नान नहीं कर सके।
शंकराचार्य का तीखा बयान
> “हमारे संतों पर लाठियां चलाई गईं। बड़े अधिकारी वहीं खड़े थे और तमाशा देखते रहे।
हम संगम से लौट रहे थे, लेकिन अब न लौटेंगे।
अब हम स्नान करेंगे और कहीं नहीं जाएंगे।
यह सब अचानक नहीं हुआ है, यह सब सरकार के इशारे पर हो रहा है।
महाकुंभ में अव्यवस्थाओं पर सवाल उठाने का यही परिणाम है।”
संत समाज में आक्रोश और संवाद की मांग
घटना के बाद शंकराचार्य अपने शिविर में ही रुके रहे। संत समाज ने कहा कि माघ मेला केवल प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन आस्था और संत परंपराओं का जीवंत केंद्र है। भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से बचने के लिए प्रशासन और संतों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन ने बताया कि मौनी अमावस्या पर संगम क्षेत्र में भीड़ अत्यधिक थी और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता थी। किसी भी अव्यवस्था से बचने के लिए तत्काल निर्णय लेने पड़े। पूरे मामले की समीक्षा जारी है।
आस्था और व्यवस्था का संतुलन
घटना यह दर्शाती है कि विशाल धार्मिक आयोजनों में आस्था, परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था का संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संवाद और सम्मान आवश्यक है।
