एनजीटी में दायर मुकदमे के दबाव में यमुना खादर की जांच, पहले ही सतर्क कर दिए गए खननकर्ता!

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़ 

एनजीटी में दायर मुकदमे के दबाव में यमुना खादर की जांच, पहले ही सतर्क कर दिए गए खननकर्ता!

पचहरा–नौरसपुर में दिल्ली–गाजियाबाद की संयुक्त टीम का दौरा, जांच के दिन खनन रहा पूरी तरह बंद

गाजियाबाद । यमुना नदी में पचहरा गांव के समीप हो रहे कथित अवैध खनन के मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर एक मुकदमे के सिलसिले में शुक्रवार को दिल्ली और गाजियाबाद प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम ने पचहरा व नौरसपुर स्थित खनन स्थलों का निरीक्षण किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पचहरा निवासी बिट्टू चौधरी पुत्र लीलू सिंह द्वारा कुछ समय पूर्व एनजीटी में यमुना नदी में अवैध खनन को लेकर याचिका दायर की गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 21 जनवरी निर्धारित है। याचिका में खनन से जुड़े फोटो, वीडियो एवं मीडिया में प्रकाशित समाचारों को भी साक्ष्य के रूप में दाखिल किया गया है।

शिकायत की सत्यता परखने पहुंची संयुक्त टीम

एनजीटी के निर्देश पर शिकायत की वास्तविकता जानने के लिए गठित इस संयुक्त टीम में दिल्ली से डीएम, एसडीएम व तहसीलदार तथा गाजियाबाद से एडीएम एवं खनन अधिकारी शामिल रहे। टीम ने यमुना खादर क्षेत्र में पचहरा और नौरसपुर के खनन स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी यमुना नदी के बीच धार से खनन किए जाने और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें समय-समय पर सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं, जिन्हें मीडिया द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। यही सामग्री एनजीटी में भी प्रस्तुत की गई है।

जांच के दिन बंद रहा खनन, उठे सवाल

गौरतलब है कि 17 जनवरी 2026 की सुबह से ही दोनों खदानों में खनन कार्य पूरी तरह बंद पाया गया। इस पर स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि गाजियाबाद के खनन विभाग से जुड़े अधिकारियों द्वारा संयुक्त टीम के आगमन की सूचना पहले ही खनन पट्टाधारकों को दे दी गई थी, ताकि वे स्वयं को सुरक्षित कर सकें। सूत्रों के अनुसार शनिवार को टीम के आने की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, जिसके चलते खनन कार्य रोक दिया गया।

हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि खनन पट्टाधारकों के प्रशासनिक गलियारों में इतने मजबूत संपर्क हैं कि उन्हें हर गतिविधि की भनक पहले से लग जाती है।

अब एनजीटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

बताया जा रहा है कि एनजीटी द्वारा गठित इस टीम की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर ही 21 जनवरी को कोर्ट आगामी आदेश जारी करेगा। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जांच रिपोर्ट में अवैध खनन के आरोपों को किस हद तक सही पाया जाता है या फिर सब कुछ औपचारिकता तक ही सीमित रह जाता है।

फिलहाल यमुना नदी, पर्यावरण और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले में प्रशासनिक निष्पक्षता पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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