रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
मेरठ कपसाड़ कांड: देर रात युवती की बरामदगी, एडीजी–डीआईजी ने संभाला मोर्चा, हत्या–अपहरण से जातीय तनाव तक हिला प्रदेश
फोन कॉल से खुली लोकेशन, हरिद्वार पुलिस की मदद से सहारनपुर में गिरफ्तारी; मां की मौत, धरना-प्रदर्शन और सियासी उबाल के बाद बड़ी कार्रवाई
मेरठ । कपसाड़ गांव से लापता दलित युवती को शनिवार देर रात पुलिस ने सहारनपुर से सकुशल बरामद कर लिया। इसी के साथ आरोपी पारस सोम को भी गिरफ्तार कर लिया गया। करीब साठ घंटे चले इस हाईप्रोफाइल प्रकरण में एडीजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर के अधिकारियों को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। युवती की बरामदगी के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली, हालांकि मां की मौत, अपहरण और जातीय तनाव से जुड़ा यह मामला अब भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
एडीजी–डीआईजी ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता और बिगड़ते सामाजिक माहौल को देखते हुए एडीजी, डीआईजी और एसएसपी ने स्वयं मामले की कमान संभाली। जैसे ही आरोपी पारस ने गांव की सीमा छोड़ी, पुलिस की टीमें हरकत में आ गईं। अधिकारियों ने हरिद्वार पुलिस के सहयोग से युवती को सुरक्षित बरामद किया और आरोपी को हिरासत में ले लिया। शाम करीब सात बजे पुलिस के आंतरिक संचार समूह में अधिकारियों ने संदेश डालकर सभी टीमों को आरोपी की गिरफ्तारी की सूचना दी।
फोन कॉल से खुली पूरी कड़ी
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा के अनुसार आरोपी और युवती मोबाइल का नियमित प्रयोग नहीं कर रहे थे, जिससे तलाश कठिन हो रही थी। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र के सहारे पुलिस आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान आरोपी पारस ने अपने एक मित्र को फोन कर कहा—“मैं बाहर निकल रहा हूं…”। यह कॉल सर्विलांस पर आ गई। कॉल सुनते ही मेरठ पुलिस सक्रिय हुई और तुरंत हरिद्वार पुलिस से संपर्क साधा गया। सड़क पर घेराबंदी कर दी गई।
ट्रेन से सफर और स्टेशन पर घेराबंदी
इससे पहले युवक-युवती ट्रेन से आगे बढ़ चुके थे। सूचना मिलते ही हरिद्वार पुलिस ने तत्काल देहात पुलिस को संबंधित रेलवे स्टेशन भेजा। मेरठ पुलिस भी पीछे-पीछे सक्रिय रही, लेकिन उससे पहले ही हरिद्वार पुलिस ने युवती को सकुशल बरामद कर लिया और आरोपी पारस को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस पूछताछ में आरोपी का दावा
पुलिस हिरासत में पारस सोम ने दावा किया कि उसका और रूबी का तीन साल से प्रेम संबंध था। दोनों की पहचान कॉलेज के दौरान हुई थी और दोनों ने सहमति से साथ जाने का निर्णय लिया। आरोपी का कहना है कि परिवार द्वारा रूबी की शादी तय किए जाने के कारण तनाव बढ़ा और विरोध के दौरान हाथापाई में फरसे से वार हो गया।
परिजनों का आरोप: हमला कर जबरन ले जाया
वहीं, युवती के परिजनों का आरोप है कि पारस ने जानबूझकर रूबी की मां सुनीता पर धारदार हथियार से हमला किया और गंभीर रूप से घायल करने के बाद युवती को जबरन अपने साथ ले गया। सुनीता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद मामला अपहरण से बढ़कर हत्या के गंभीर आरोपों में बदल गया।
घटना का दिन और गांव में बवाल
यह घटना गुरुवार 8 जनवरी को हुई थी। उसी दिन गांव में माहौल बिगड़ गया। युवती दलित समाज से और आरोपी क्षत्रिय समाज से होने के कारण मामला जातीय तनाव में बदल गया। गांव में आक्रोश फैल गया, धरना-प्रदर्शन शुरू हो गए और हालात संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
प्रदेश की राजनीति में उबाल
मां की मौत और युवती के लापता होने की खबर के बाद सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। इसे दलित उत्पीड़न और कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए गए। कई स्थानों पर जातीय उन्माद की आशंका के चलते प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ी।
खतौली से दिल्ली, गुरुग्राम और सहारनपुर तक
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के बाद आरोपी युवती को लेकर पहले खतौली गया, फिर दिल्ली पहुंचा जहां होटल में रुका। इसके बाद दोनों गुरुग्राम गए और वहां एक मित्र के पास ठहरे। गांव में बढ़ते तनाव और पुलिस दबाव के चलते आरोपी ने गुरुग्राम से ट्रेन द्वारा सहारनपुर की ओर रुख किया, जहां देर रात पुलिस ने उन्हें घेर लिया।
आशा ज्योति केंद्र में युवती, बढ़ सकती हैं धाराएं
बरामदगी के बाद युवती को महिला पुलिस की निगरानी में आशा ज्योति केंद्र भेजा गया है। मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके बयान दर्ज कराए जाएंगे। पुलिस के अनुसार सुनीता हत्याकांड में फिलहाल दोनों आरोपियों को नामजद किया गया है और युवती के बयान के आधार पर मामले में अन्य गंभीर धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं।
समग्र तस्वीर
कपसाड़ कांड देर रात हुई युवती की बरामदगी से सामने आया, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि में प्रेम संबंध, पारिवारिक विरोध, हिंसा, एक महिला की मौत और जातीय तनाव की लंबी श्रृंखला जुड़ी है। प्रशासनिक सक्रियता, तकनीकी सर्विलांस और अंतरजनपदीय पुलिस सहयोग से मामला सुलझा, लेकिन अब भी न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।
