कपसाड़ कांड के बाद प्रदेश में सियासी उबाल, मुख्यालयों की सख्त प्रतिक्रिया, धरना-प्रदर्शन और बढ़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

कपसाड़ कांड के बाद प्रदेश में सियासी उबाल, मुख्यालयों की सख्त प्रतिक्रिया, धरना-प्रदर्शन और बढ़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती

मेरठ / लखनऊ सरधना विधानसभा क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण की घटना के बाद मेरठ जनपद ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश सियासी और प्रशासनिक हलचल के केंद्र में आ गया है। शासन-प्रशासन से लेकर विपक्षी दलों के मुख्यालयों तक इस घटना को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

 

मुख्यालयों से प्रतिक्रियाएं : सख्ती के निर्देश

राज्य सरकार के स्तर पर इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि

अपहृत बेटी की शीघ्र व सकुशल बरामदगी सुनिश्चित की जाए,

दोषियों की गिरफ्तारी में किसी भी प्रकार की ढिलाई न हो,

गांव और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक शांति और जातीय सौहार्द हर हाल में बनाए रखा जाए।

प्रशासनिक मुख्यालयों ने यह भी संकेत दिए हैं कि मामले की लगातार निगरानी की जा रही है और जांच में लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

 

विपक्षी दलों की सियासी प्रतिक्रिया और ट्वीट लाइनें

घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने इसे महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की विफलता बताया और कहा कि “जब तक बेटी सुरक्षित नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख ने बयान जारी कर कहा कि “दलित महिला की हत्या और बेटी का अपहरण अत्यंत शर्मनाक है, सरकार को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।”

सोशल मंचों पर भी लगातार बयान और संदेश सामने आए, जिनमें सरकार से तत्काल न्याय और जवाबदेही की मांग की जा रही है।

सांसद चंद्रशेखर और क्षेत्रीय राजनीति

भीम आर्मी प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर ने पीड़ित परिवार से मिलने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासन ने हालात को देखते हुए उन्हें गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर प्रशासन और समर्थकों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी बनी। सांसद ने साफ कहा कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

विधायक अतुल प्रधान की भूमिका

सरधना से विधायक अतुल प्रधान शुरू से ही इस मामले को लेकर सक्रिय हैं।

उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलने का प्रयास किया और पुलिस द्वारा रोके जाने पर धरना-प्रदर्शन किया।

विधायक ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और बेटी की सकुशल बरामदगी की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न है।

अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

पुलिस ने हत्या, अपहरण और अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

मुख्य आरोपी की तलाश में कई टीमें गठित की गई हैं।

आरोपी के परिजनों और कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

तकनीकी साक्ष्यों और सूचनाओं के आधार पर लगातार दबिश दी जा रही है।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और अपहृत बेटी की बरामदगी नहीं हो सकी है।

कानून-व्यवस्था और जातीय तनाव की आशंका

घटना के बाद कपसाड़ गांव और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन को आशंका है कि

यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आक्रोश उग्र रूप ले सकता है,

जातीय तनाव और हिंसा की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

इसी कारण गांव में बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है और लगातार गश्त की जा रही है।

प्रदेश की राजनीति पर असर

कपसाड़ कांड अब एक स्थानीय अपराध से आगे बढ़कर प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

सरकार के लिए यह अपनी कानून-व्यवस्था की छवि बचाने की परीक्षा है।

आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अपहृत बेटी कब और किस हालत में मिलती है तथा दोषियों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

निष्कर्ष

कपसाड़ की घटना ने प्रशासन, राजनीति और समाज—तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर शोकग्रस्त परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है, दूसरी ओर पूरा प्रदेश इस बात पर नजर लगाए है कि क्या कानून अपना प्रभाव दिखा पाएगा या यह मामला भी केवल सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट कर रह जाएगा।

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