जन वाणी न्यूज़
वरिष्ठ पत्रकार राकेश मोहन गोयल का ब्रेन स्ट्रोक से निधन, पत्रकारिता जगत ने खोया समाज का निर्भीक आईना
मुरादनगर । वरिष्ठ पत्रकार, धार्मिक चिंतक एवं प्रखर लेखक श्री राकेश मोहन गोयल का बृहस्पतिवार को ब्रेन स्ट्रोक के चलते दुखद निधन हो गया। सोमवार रात्रि सोते समय अचानक उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया, जिसके बाद परिजन तत्काल उपचार के लिए उन्हें यशोदा अस्पताल, संजय नगर लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, किंतु अंततः पत्रकारिता जगत की यह सशक्त आवाज शांत हो गई।
स्वर्गीय गोयल का निधन न केवल एक व्यक्ति का जाना है, बल्कि सिद्धांतनिष्ठ, निर्भीक और समाज के प्रति जवाबदेह पत्रकारिता के एक पूरे युग का अवसान है।
करीब 55 वर्षों तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे श्री गोयल ने जनहित, सामाजिक न्याय, नैतिक मूल्यों और धार्मिक चेतना से जुड़े विषयों को अपनी लेखनी का केंद्र बनाया। उन्होंने दैनिक जागरण में लगभग 19 वर्षों तक संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके पश्चात वे लंबे समय तक राष्ट्रीय सहारा से जुड़े रहे, जहां उनकी तथ्यपरक, निर्भीक और विचारोत्तेजक लेखनी ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई।
श्री गोयल को केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि समाज का आईना माना जाता था। वे सत्ता, व्यवस्था और सामाजिक कुरीतियों पर बेबाक टिप्पणी करने से कभी नहीं चूके। उनकी कलम न तो दबाव में झुकी और न ही समझौतों की मोहताज रही। वे पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और समाज के प्रति नैतिक दायित्व मानते थे।
धार्मिक चिंतक के रूप में भी उनकी अलग पहचान थी। उनके लेखों में संवेदना, विवेक और संस्कार का समन्वय दिखाई देता था। वे नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत थे, जिन्होंने ईमानदारी और सच्चाई को पत्रकारिता का मूल मंत्र सिखाया।
उनके निधन की सूचना मिलते ही पत्रकारिता जगत, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा क्षेत्रवासियों में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न संगठनों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि स्व. गोयल जैसे निर्भीक पत्रकार आज के दौर में विरले ही मिलते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार राकेश मोहन गोयल का जीवन और उनकी लेखनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सच, साहस और सरोकारों की अमिट विरासत बनकर सदैव जीवित रहेगी।
