रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
लोनी को कूड़ाघर बनाने की तैयारी?
मीरपुर हिंदू में नगर निगम गाजियाबाद के कूड़ा निस्तारण के फैसले पर भड़के विधायक मदन भैया, मुख्यमंत्री को लिखा तीखा पत्र
गाजियाबाद। लोनी की बदहाल पर्यावरणीय और भौगोलिक स्थिति के बीच गाजियाबाद नगर निगम के ठोस अपशिष्ट निस्तारण के लिए मीरपुर हिंदू गांव की 8.2650 हेक्टेयर भूमि हस्तगत किए जाने का निर्णय अब सियासी और जनाक्रोश का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। विधायक खतौली मदन भैया ने इस फैसले को लोनी की जनता के जीवन-मरण का प्रश्न बताते हुए 28 अगस्त 2025 को माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शासनादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
8.2650 हेक्टेयर जमीन पर घोर आपत्ति
विधायक द्वारा लिखे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ग्राम मीरपुर, तहसील लोनी, जिला गाजियाबाद की
खसरा संख्या 523 की 4.3350 हेक्टेयर भूमि तथा
खसरा संख्या 526 की 3.9300 हेक्टेयर भूमि,
कुल 8.2650 हेक्टेयर, को वैज्ञानिक पद्धति से क्लस्टर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट हेतु गाजियाबाद नगर निगम को सौंपने की सहमति दी गई है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव कल्याण बनर्जी द्वारा आयुक्त मेरठ मंडल को पत्र भेजा गया है।
विधायक मदन भैया ने इसे बिना मौका मुआयना किया गया अव्यावहारिक और जनविरोधी निर्णय करार दिया है।
“लोनी पहले ही नारकीय जीवन जी रही है”
पत्र में विधायक ने लोनी की जमीनी हकीकत का उल्लेख करते हुए लिखा है कि—
लोनी 55 वार्डों में फैली,
लगभग 20 लाख की आबादी वाली,
उत्तर प्रदेश की सर्वाधिक जनसंख्या वाली नगर पालिका है,
जिसकी सीमा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटी हुई है।
यहां प्रतिदिन करीब 700 टन कूड़ा निकलता है, जिसके समुचित निस्तारण के अभाव में जगह-जगह कूड़े के पहाड़ खड़े हैं। निठोरा रोड स्थित राजकीय विद्यालय के पास लगा कूड़े का विशाल ढेर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खुले खतरे का उदाहरण बताया गया है।
विधानसभा से एनजीटी तक उठाई आवाज
विधायक ने पत्र में यह भी रेखांकित किया है कि—
लोनी के कूड़ा निस्तारण को लेकर उन्होंने विधानसभा में प्रश्न उठाया,
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय हरित अधिकरण में याचिका भी दायर की गई,
जिसके दबाव में केवल लोनी के कूड़े के निस्तारण हेतु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किया गया।
इसके बावजूद लोनी की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया, और अब गाजियाबाद नगर निगम का कूड़ा भी लोनी में डालने का आदेश स्थिति को और भयावह बना देगा।
“यह ताबूत में आखिरी कील है”
मदन भैया ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा है कि—
> “जहां लोनी पहले से ही खराब पर्यावरण, भीषण प्रदूषण और अव्यवस्थित यातायात से कराह रही है, वहां गाजियाबाद का कूड़ा डालने का निर्णय लोनी को बर्बाद करने के लिए ताबूत में आखिरी कील ठोंकने जैसा है।”
उन्होंने वातानुकूलित कक्षों में बैठकर निर्णय लेने वाले अधिकारियों से लोनी आकर जमीनी हालात देखने की अपील की है।
100 कूड़ा ट्रक, ठप यातायात और उबलता जनाक्रोश
विधायक ने आगाह किया है कि
प्रतिदिन लगभग 100 कूड़ा ट्रकों की आवाजाही से
पहले से चरमराई यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।
यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो मीरपुर हिंदू सहित पूरी लोनी की जनता आंदोलन के लिए मजबूर होगी। उन्होंने इसे “करो या मरो” की स्थिति बताते हुए कहा कि यह फैसला लोगों की ऑक्सीजन का पाइप हटाने जैसा है।
शासन से पुनर्विचार की मांग
पत्र के अंत में विधायक मदन भैया ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि
यह निर्णय जनहित में नहीं है,
इससे गांव मीरपुर हिंदू और समस्त लोनी वासियों का जीवन प्रभावित होगा,
इसलिए उत्तर प्रदेश शासन को अपने निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करते हुए
उक्त शासनादेश को निरस्त कर लोनी की जनता को राहत देनी चाहिए।
अब नजरें मुख्यमंत्री पर
मीरपुर हिंदू में कूड़ा निस्तारण को लेकर उठे इस विरोध ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य का है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस चेतावनी भरे पत्र पर क्या रुख अपनाता है—
जनता की सांसें बचेंगी या विरोध की चिंगारी आग बनेगी?
