राजस्थान से बड़ी खबर , अवैध खनन माफिया के आगे कानून बेबस!

0
38

रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

राजस्थान से बड़ी खबर

अवैध खनन माफिया के आगे कानून बेबस!

पीड़ित एएसआई राजेश मीणा 

कर्तव्य निभाने की सज़ा—एएसआई की पिटाई, फिर निलंबन

केकड़ी (अजमेर) में वर्दी रौंदी गई, सत्ता–पुलिस–माफिया गठजोड़ बेनकाब

डोटासरा का तीखा प्रहार—“यह सरकार नहीं, माफिया राज है”

अलवर । राजस्थान के अजमेर जिले के केकड़ी सदर थाना से सामने आया यह मामला केवल एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं, बल्कि कानून के राज को कुचलने की खौफनाक मिसाल बनता जा रहा है। अवैध खनन रोकने की हिम्मत दिखाने वाले एएसआई राजेश मीणा को पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर हमलावरों पर कार्रवाई के बजाय उन्हें ही निलंबित कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में माफिया ताकतवर और ईमानदार अफसर असुरक्षित होते जा रहे हैं।

माफिया के सामने अकेला पुलिसकर्मी

एएसआई राजेश मीणा के मुताबिक, वे सूचना पर मौके पर पहुंचे तो जेसीबी मशीनें और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम अवैध खनन में जुटी थीं। कार्रवाई शुरू होते ही खनन माफिया और उसके समर्थक उग्र हो गए। हालात तनावपूर्ण थे, लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद तीन घंटे तक थाना स्तर से कोई मदद नहीं पहुंची। सवाल यह है कि जब एक अधिकारी संकट में था, तब पूरा तंत्र आखिर किसके इशारे पर मौन साधे बैठा रहा?

छोड़ दो’ का दबाव, नहीं माने तो अंजाम तय

आरोप है कि बाद में पहुंचे अधिकारियों ने ही मशीनें और वाहन छोड़ने को कहा। एएसआई ने साफ इनकार कर दिया—कहा कि मामला सार्वजनिक हो चुका है, कानून से समझौता नहीं होगा। इसके बाद फोन पर धमकियों का दौर शुरू हुआ—निलंबन, बर्खास्तगी और अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई।

वर्दी पर हमला, हड्डियां टूटीं

ड्यूटी से लौटते समय एएसआई पर जानलेवा हमला किया गया।
उंगलियां तोड़ दी गईं, सिर फट गया, चार टांके लगे।
यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं था, बल्कि पुलिस की वर्दी और राज्य की कानून व्यवस्था पर सीधा प्रहार था।

इनाम में निलंबन—अपराधियों को संदेश?

सबसे चौंकाने वाली बात यह कि इस पूरे प्रकरण के बाद हमलावरों पर सख्त कार्रवाई के बजाय विभाग ने एएसआई राजेश मीणा को ही निलंबित कर दिया। यह फैसला क्या संदेश देता है?
क्या राजस्थान में अब ईमानदारी अपराध बन चुकी है?
क्या अवैध खनन रोकना पुलिसकर्मियों के लिए सबसे बड़ा “कसूर” हो गया है?

डोटासरा का तीखा हमला

इस मामले पर कांग्रेस के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने एक्स हैंडल से सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा—

> “यह सिर्फ एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं, बल्कि कानून के राज की हत्या है। भाजपा नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से खनन माफिया बेलगाम है। जो अफसर ईमानदारी दिखाता है, उसे कुचल दिया जाता है।”

 

डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार मौन दर्शक बनी हुई है और पूछा कि क्या भाजपा सरकार अवैध खनन के आगे पूरी तरह समर्पण कर चुकी है?

प्रशासन की चुप्पी, सवालों का अंबार

अब तक न तो यह स्पष्ट हुआ है कि

तीन घंटे तक पुलिस बल क्यों नहीं पहुंचा?

हमलावरों और धमकी देने वालों पर क्या कार्रवाई हुई?

निलंबन का वास्तविक आधार क्या है—अनुशासन या दबाव?

पुलिस प्रशासन का पक्ष

 

दूसरी ओर, अजमेर पुलिस प्रशासन का कहना है कि एएसआई राजेश मीणा का निलंबन किसी खनन कार्रवाई के कारण नहीं, बल्कि उनके खिलाफ दर्ज एक शिकायत और विभागीय जांच के आधार पर किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक व्यक्ति द्वारा शिकायत दी गई थी, जिसमें मारपीट और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए थे।

 

पुलिस का कहना है कि मामले की आंतरिक जांच की गई, जिसके बाद नियमानुसार निलंबन की कार्रवाई अमल में लाई गई। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि खनन माफिया के हमले, धमकी, अथवा गंभीर चोटों से जुड़े आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या मेडिकल/कानूनी दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।

 

जांच की मांग और बढ़ता विवाद

 

एएसआई राजेश मीणा के वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस का विषय बन गया है। कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि

 

क्या वाकई अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के कारण एएसआई को निशाना बनाया गया,

 

या फिर निलंबन पूरी तरह विभागीय नियमों के तहत की गई कार्रवाई है।

 

 

राजस्थान में कौन सुरक्षित?

यह मामला अब एएसआई राजेश मीणा तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल बन चुका है कि अगर पुलिस ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या? इस कारण  अधिकारियों एवं सरकार को उच्चस्तरीय जांच करा कर सच्चाई सामने लाना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here