उद्घाटन से पहले ज़मीनी रिपोर्ट: एक्सप्रेसवे तैयार, ज़मीन का मिज़ाज बदल चुका है

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

उद्घाटन से पहले ज़मीनी रिपोर्ट: एक्सप्रेसवे तैयार, ज़मीन का मिज़ाज बदल चुका है

ट्रॉनिका सिटी–मंडोला विहार बेल्ट में कृषि भूमि से रियल एस्टेट तक तेज़ हलचल, बिल्डरों की सक्रियता चरम पर

गाजियाबाद।दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और इसके शीघ्र ही आम जनता के लिए खुलने की तैयारी चल रही है। औपचारिक उद्घाटन भले अभी शेष हो, लेकिन ज़मीन पर इसका असर पूरी ताकत से दिखाई देने लगा है। गाजियाबाद जनपद का लोनी–ट्रॉनिका सिटी–मंडोला विहार क्षेत्र इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।

जहां कुछ समय पहले तक यह इलाका कृषि प्रधान और सीमित औद्योगिक गतिविधियों तक सिमटा था, वहीं अब यहां रियल एस्टेट की हलचल, भूमि सौदों की बातचीत और भविष्य की परियोजनाओं की सुगबुगाहट साफ़ महसूस की जा सकती है।

 

हाईवे लगभग तैयार, संपर्क ने बदल दिया समीकरण

ज़मीनी हकीकत यह है कि—

एक्सप्रेसवे का अधिकांश हिस्सा बनकर तैयार

ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र से सीधा संपर्क

मंडोला विहार जैसी अधिसूचित आवासीय योजना की मौजूदगी

इन तीनों ने मिलकर इस पूरे क्षेत्र को भविष्य का शहरी–औद्योगिक केंद्र बना दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने से पहले ही यहां की भौगोलिक अहमियत कई गुना बढ़ चुकी है।

 

गांवों की कृषि भूमि पर सबसे बड़ा असर

ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि

ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र और मंडोला विहार से सटे गांवों की

कृषि भूमि के दामों में तेज़ उछाल

बिल्डरों और भूमि दलालों की लगातार आवाजाही

अब सामान्य दृश्य बन चुका है।

कई किसानों ने स्वीकार किया कि उन्हें पहले जहां जमीन बेचने में कठिनाई होती थी, वहीं अब खुद खरीददार संपर्क कर रहे हैं।

 

बिल्डरों की मौजूदगी ज़मीनी सच्चाई

क्षेत्र में सक्रिय रियल एस्टेट से जुड़े लोगों के अनुसार—

बड़े भू-खंडों की तलाश तेज़

भविष्य की आवासीय और मिश्रित उपयोग परियोजनाओं की योजना

एक्सप्रेसवे खुलते ही मांग बढ़ने की स्पष्ट उम्मीद

यही कारण है कि उद्घाटन से पहले ही भूमि सुरक्षित करने की होड़ शुरू हो चुकी है।

 

उद्योग + आवास = मांग का स्थायी आधार

ट्रॉनिका सिटी के उद्योगों को—

श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए आवास

वेयरहाउस और लॉजिस्टिक स्पेस

सेवा क्षेत्र की जरूरत

लगातार बनी रहती है। मंडोला विहार और उसके आसपास का इलाका इस मांग को पूरा करने की प्राकृतिक क्षमता रखता है। यही कारण है कि इस बेल्ट की जमीन को लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रामीण जीवन में दिखने लगा बदलाव

ज़मीनी स्तर पर—

गांवों में नए निर्माण की शुरुआत

किराये के मकानों की मांग

ढाबे, दुकानें और परिवहन गतिविधियों में बढ़ोतरी

जैसे संकेत सामने आने लगे हैं। यह साफ़ दर्शाता है कि क्षेत्र कृषि से शहरी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

 

प्रशासन के सामने चुनौती और अवसर

एक्सप्रेसवे के जनता को समर्पित होते ही इस क्षेत्र में गतिविधियां और तेज़ होंगी। ऐसे में—

अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण

भूमि उपयोग नियमों का सख़्त पालन

जल, सीवर और यातायात की पूर्व योजना

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

उद्घाटन से पहले दिशा तय करना ज़रूरी

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन केवल एक सड़क का शुभारंभ नहीं होगा, बल्कि यह इस पूरे क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि अभी से नियोजन, निगरानी और संतुलन पर ध्यान दिया गया, तो ट्रॉनिका सिटी–मंडोला विहार बेल्ट विकास का मॉडल बन सकता है। अन्यथा, यही रफ्तार अव्यवस्था का कारण भी बन सकती है।

 

उद्घाटन से पहले ही ज़मीनी सच्चाई यह है कि एक्सप्रेसवे ने ट्रॉनिका सिटी–मंडोला विहार क्षेत्र की पहचान बदल दी है। कृषि भूमि अब केवल खेत नहीं, बल्कि भविष्य की पूंजी बन चुकी है। जैसे ही एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए खुलेगा, इस क्षेत्र की तस्वीर और तेज़ी से बदलने तय है।

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