उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगाई, 29 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

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रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़

उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगाई, 29 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक, दोषी पूर्व विधायक फिलहाल जेल में ही रहेंगे

नई दिल्ली। उन्नाव बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो गई है कि सेंगर जेल से बाहर नहीं आए थे और वर्तमान में भी न्यायिक हिरासत में ही हैं। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को निर्धारित की है।

 

23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने दी थी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की अपील पर सुनवाई करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था और कुछ शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश पारित किया था।

इस आदेश के बाद रिहाई की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मामले को चुनौती दी गई।

सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर शीर्ष अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई करते हुए—

दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी,

और कहा कि जब तक मामले की विस्तृत सुनवाई नहीं हो जाती, स्थिति यथावत रखी जाए।

इस कारण सेंगर की रिहाई नहीं हो सकी और वे पहले की तरह जेल में ही बने हुए हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह कहा कि—

यह मामला गंभीर अपराध से संबंधित है,

हाईकोर्ट के आदेश में उठे कानूनी प्रश्नों पर विस्तार से विचार आवश्यक है,

और अंतिम निर्णय से पहले अंतरिम रोक लगाना उचित है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों की समीक्षा न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य किसी भी संभावित त्रुटि को समय रहते देखना होता है।

सामाजिक संगठनों और महिला समूहों की प्रतिक्रिया

दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और महिला अधिकारों से जुड़े समूहों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए थे।
इन संगठनों ने—

पीड़िता की सुरक्षा,

न्यायिक प्रक्रिया में संवेदनशीलता,

और ऐसे मामलों में सतर्क दृष्टिकोण अपनाने

की मांग उठाई थी।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद कई संगठनों ने इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया संतुलित कदम बताया।

मामले की पृष्ठभूमि

वर्ष 2017 में उन्नाव में नाबालिग से बलात्कार का मामला सामने आया।

जांच के बाद प्रकरण सीबीआई को सौंपा गया।

वर्ष 2019 में विशेष अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इसके अलावा अन्य संबंधित मामलों में भी उन्हें दंडित किया गया।

यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और विभिन्न स्तरों पर सुनवाई चल रही है।

 

वर्तमान स्थिति

कुलदीप सिंह सेंगर जेल में ही बंद हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक लागू है।

29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई होगी।

अंतिम निर्णय उसी सुनवाई के बाद तय होगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश यह दर्शाता है कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और संतुलन के साथ आगे बढ़ती है।
अंतरिम रोक का उद्देश्य न तो किसी को दोषी ठहराना है और न ही राहत देना, बल्कि कानून के सभी पहलुओं पर समुचित विचार सुनिश्चित करना है।

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