रविन्द्र बंसल प्रधान संपादक / जन वाणी न्यूज़
संसद पर आतंकी हमला (13 दिसंबर 2001)
लोकतंत्र की रक्षा में शहीद हुए जांबाज़ों को राष्ट्र की नमन
नई दिल्ली। 13 दिसंबर 2001—भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन, जब देश की सर्वोच्च विधायी संस्था संसद भवन को निशाना बनाकर सुनियोजित आतंकी हमला किया गया। भारी सुरक्षा घेरे के बावजूद किए गए इस हमले का उद्देश्य भारत की संवैधानिक व्यवस्था को झकझोरना था। सुरक्षाबलों की तत्परता और अदम्य साहस ने एक बड़े नरसंहार को टाल दिया, किंतु इसकी कीमत हमारे वीर सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राणों से चुकाई।
नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद भवन पर हुआ एक आतंकवादी हमला था। यह हमला जैश-ए-मोहम्मद के पाँच आतंकवादियों द्वारा किया गया था, जिसमें दिल्ली पुलिस के छह जवान, संसद सुरक्षा सेवा के दो जवान और एक माली शहीद हो गए थे।
घटना का क्रम: मिनट-दर-मिनट आतंक की साज़िश
दोपहर करीब 11:40 बजे, फर्जी सरकारी पहचान पत्र और संसद के पास जारी पासों का दुरुपयोग करते हुए आतंकियों ने संसद परिसर में प्रवेश का प्रयास किया। जैसे ही उनकी गतिविधि संदिग्ध लगी, सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और विस्फोटक हथगोले फेंकना शुरू कर दिया। इस हमले में दिल्ली पुलिस के छह जवान, संसद सुरक्षा सेवा के दो जवान और एक माली शहीद हो गए थे। सुरक्षाबलों की तत्परता और अदम्य साहस ने एक बड़े नरसंहार को टाल दिया , पांचो आतंकियों को ढेर कर दिया । किंतु इसकी कीमत हमारे वीर सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राणों से चुकाई। आज राष्ट्र इस हमले में शहीद हुए जवानों को नमन करता है।
