जन वाणी न्यूज़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ आगमन से पहले कद्दावर किसान नेता नीरज त्यागी घर में नजरबंद
मुआवजा आंदोलन और मीरपुर कचरा प्रबंधन संयंत्र के विरोध की आवाज पर पहरा?
मेरठ/गाजियाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेरठ आगमन से ठीक पहले क्षेत्र के प्रखर किसान नेता नीरज त्यागी को पुलिस द्वारा उनके ही घर में सीमित कर दिए जाने की घटना ने ग्रामीण अंचल में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। किसानों का आरोप है कि यह कदम केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि “आवाज दबाने की सोची-समझी कार्रवाई” है।
छह गांवों की जमीन और अधिग्रहण का दर्द
नीरज त्यागी पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा अधिग्रहित छह गांवों की भूमि के उचित मुआवजे की मांग को लेकर संघर्षरत हैं।
किसानों का कहना है कि:
जमीन कौड़ियों के भाव ली गई, जबकि बाजार मूल्य कहीं अधिक था।
पुनर्वास और रोजगार के आश्वासन कागजों तक सीमित रहे।
कई परिवार आज भी आर्थिक संकट और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।
त्यागी लगातार पंचायत, धरना और ज्ञापन के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। ग्रामीण उन्हें “जमीन और जनाधिकार की लड़ाई का चेहरा” मानते हैं।
मीरपुर कचरा प्रबंधन संयंत्र: एक माह से जारी धरना
हिंदू मीरपुर गांव में बंद पड़े ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र के विरोध में किसान एक महीने से अधिक समय से धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि:
संयंत्र से दुर्गंध और प्रदूषण फैलता है।
बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
ग्रामवासियों की सहमति के बिना निर्णय थोपे गए।
इस आंदोलन का नेतृत्व भी नीरज त्यागी कर रहे थे। किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले उन्हें घर में सीमित करना इस संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश है।
किसानों का सीधा आरोप: “सरकारी तंत्र से दबाई जा रही आवाज”
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने खुलकर कहा कि सत्तारूढ़ दल की सरकार विरोध को सहन नहीं कर पा रही। उनका आरोप है कि जब भी कोई बड़ा राजकीय कार्यक्रम होता है, तब आंदोलनकारियों को घरों में बैठा दिया जाता है ताकि मंच से केवल एक ही पक्ष सुनाई दे।
किसानों का कहना है:
> “यह लोकतंत्र है या डर का शासन? यदि हमारी मांगें गलत हैं तो खुली चर्चा हो, पर हमें घर में कैद क्यों किया जा रहा है?”
प्रशासन का पक्ष: “शांति व्यवस्था सर्वोपरि”
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा और शांति बनाए रखना आवश्यक है। संभावित विरोध या अवरोध को रोकने के लिए यह कदम एहतियातन उठाया गया है।
अधिकारियों का तर्क है कि यह अस्थायी व्यवस्था है और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सामान्य स्थिति बहाल कर दी जाएगी।
राजनीतिक असर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान प्रश्न फिर केंद्र में
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूमि, मुआवजा और पर्यावरण जैसे मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। किसान असंतोष यदि बढ़ा, तो यह आने वाले समय में सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बन सकता है।
दूसरी ओर समर्थकों का कहना है कि विकास कार्यों में बाधा डालने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
निष्कर्ष: संघर्ष थमेगा या और तेज होगा?
नीरज त्यागी को घर में सीमित किए जाने से किसान आंदोलन की आग शांत होगी या और भड़केगी—यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भूमि, मुआवजा और पर्यावरण के प्रश्न पर ग्रामीण क्षेत्र में असंतोष गहराता जा रहा है।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की नजरबंदी नहीं, बल्कि उस व्यापक प्रश्न का प्रतीक बनती जा रही है—क्या जनआवाज को सुरक्षा के नाम पर सीमित किया जा सकता है, या लोकतंत्र में संवाद ही समाधान का मार्ग है?
