77वां गणतंत्र दिवस: शहीदों के बलिदान से सशक्त भारत तक—संघर्ष, संकल्प और समृद्धि की ऐतिहासिक यात्रा

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77वां गणतंत्र दिवस: शहीदों के बलिदान से सशक्त भारत तक—संघर्ष, संकल्प और समृद्धि की ऐतिहासिक यात्रा

रविन्द्र बंसल
विशेष लेख | राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

भारत का 77वां गणतंत्र दिवस केवल एक संवैधानिक उत्सव नहीं, बल्कि उन अमर शहीदों के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की सामूहिक नमन-भावना है, जिनके त्याग, तप और बलिदान से आज़ाद, संप्रभु और लोकतांत्रिक भारत का निर्माण हुआ। यह दिन अतीत के संघर्ष, वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य के संकल्प—तीनों को एक साथ जोड़ता है।

शहादत की नींव पर खड़ा गणराज्य

भारत की आज़ादी और गणतंत्र की स्थापना अनगिनत बलिदानों की देन है। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी से लेकर सीमा पर प्राण न्योछावर करने वाले ज्ञात–अज्ञात सैनिकों तक—हर शहीद ने राष्ट्र की आत्मा को मजबूत किया।
कारगिल से सियाचिन, कश्मीर से पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक, हमारे वीर जवान आज भी देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए हर पल तत्पर हैं। उनका बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।

संविधान: समानता, न्याय और लोकतंत्र का आधार

26 जनवरी 1950 को लागू हुआ भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। यह सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समान अवसर की गारंटी देता है। संविधान ने विविधताओं से भरे देश को एक सूत्र में बांधा और लोकतंत्र को जन-जन तक पहुंचाया।

कहां से कहां पहुंचा भारत: विकास की प्रेरक गाथा

स्वतंत्रता के बाद एक गरीब, संसाधन-विहीन राष्ट्र से आज भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।

आर्थिक प्रगति: कृषि से उद्योग, स्टार्टअप से स्पेस टेक्नोलॉजी तक भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए।

विज्ञान और तकनीक: चंद्रयान और गगनयान जैसी उपलब्धियों ने भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। डिजिटल इंडिया ने शासन को पारदर्शी और सेवाओं को सुलभ बनाया।

रक्षा और सुरक्षा: स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक हथियार प्रणालियां और सशक्त सशस्त्र बलों ने भारत की सामरिक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

सामाजिक उत्थान: शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और गरीब कल्याण की योजनाओं ने समावेशी विकास को गति दी।

राष्ट्रीय हित और जनभागीदारी

आज का भारत केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से आगे बढ़ रहा है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल साक्षरता और राष्ट्रसेवा—हर क्षेत्र में जनसहभागिता ने राष्ट्रीय हित को नई मजबूती दी है।

युवा शक्ति और भविष्य का भारत

देश की युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी ताकत है। नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और कौशल विकास के माध्यम से युवा भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रहे हैं। शहीदों का बलिदान युवाओं के लिए यह संदेश देता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है।

निष्कर्ष: संकल्प से सिद्धि तक

77वें गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प दोहराना आवश्यक है कि हम शहीदों के सपनों का भारत बनाएंगे—जहां न्याय हो, समानता हो, सुरक्षा हो और समृद्धि हो।
शहीदों का बलिदान हमें सिखाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल अधिकारों से नहीं, कर्तव्यों से होता है।

जय हिंद।
वंदे मातरम्।

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